रामकृष्ण मिशन के रामकृष्ण मिशन आश्रम मोराबादी राँची में रविवार को एक प्रेरणादायी भक्त सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 200 भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ पूजा एवं आरती के उपरान्त संन्यासीगण एवं ब्रह्मचारीगण के वैदिक मंत्रोच्चारण से हुआ, जिससे वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक और शांतिमय हो गया।
आश्रम के सचिव स्वामी भवेशानंद जी महाराज ने भक्तों को ध्यान एवं जप का अभ्यास कराया तथा साधना में मन की एकाग्रता के महत्व को समझाया।
तत्पश्चात स्वामी अंतरानंद जी महाराज ने पुरुषार्थ चतुष्टय विषय पर प्रवचन देते हुए कहा कि सभी धर्मों का मूल आधार नैतिकता और चरित्र निर्माण है। मनुष्य के मन में निरंतर उठने वाले विचार ही उसके चरित्र का निर्माण करते हैं। काम, क्रोध, मोह, मत्सर और अविद्या जैसे दोषों को विवेक और साधना के माध्यम से दूर करना आवश्यक है।
इस अवसर पर रामकृष्ण मिशन रायपुर से प्रकाशित पत्रिका विवेक ज्योति के संपादक स्वामी प्राप्त्यानंद जी महाराज ने पुरुषार्थ चतुष्टय को वेदान्तिक दृष्टिकोण से स्पष्ट करते हुए कहा कि मन को सर्वोच्च सत्ता में प्रतिष्ठित करना ही भक्ति का सार है। उन्होंने कहा कि बिना मन के संयोग के कोई भी आध्यात्मिक साधना सफल नहीं होती। मनुष्य को दान, पुण्य और सेवा के माध्यम से अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।
भक्ति-संगीत के क्रम में सुप्रसिद्ध गायक मधुसूदन गांगुली ने “रामकृष्ण भजो मनवा रे” तथा “महामंत्र है यह जपाकर” भजनों की मधुर प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके साथ तबले पर विपुल सरकार ने संगत की।
स्वामी ईश्वरानंद जी महाराज ने त्रिश्य घोषाल के साथ “जय जय रामकृष्ण बोलो बदने” भजन प्रस्तुत कर भक्तों को भक्ति-रस में सराबोर कर दिया। आश्रम के सुमधुर गायक स्वामी प्रभुनामानंद जी महाराज ने भी भावपूर्ण भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस पावन अवसर पर सुरेश नारायण झा ने आध्यात्मिक संगम नामक एक कविता प्रस्तुत किया
समापन अवसर पर स्वामी भवेशानंद जी महाराज ने कहा कि त्रेता युग में भगवान राम, द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण और कलियुग में श्री रामकृष्ण मानवता के लिए आध्यात्मिक प्रकाश के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने श्रीश्री सारदा देवी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अनेक सांसारिक कष्टों का सामना किया, किंतु धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ा। साथ ही स्वामी विवेकानंद की प्रेरक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने मानव सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने महाराजगण से आध्यात्मिक प्रश्न पूछे और उनके समाधान प्राप्त किए। श्रीमती रत्ना सेनगुप्ता ने अपने भाव व्यक्त किए। श्री प्रशांत देव तथा श्री वी. के. गाद्ययान ने श्री रामकृष्ण देव के मंदिर निर्माण के संबंध में अपने विचार रखे। इस अवसर पर श्री हेमेंद्रनाथ कुंडू ने मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम का समापन संगीत शिक्षक श्री श्यामल राय द्वारा “दयासिंधु रामकृष्ण” एवं “जय जय प्रभु रामकृष्ण” भजनों की प्रस्तुति के साथ हुआ।
इस पूरे कार्यक्रम का सुचारु मंच संचालन सुरेश नारायण झा (सदस्य, कार्यकारिणी समिति) ने किया। उनके साथ श्री प्रीतम बनिक भी सहयोग में उपस्थित थे।