“शिव ज्ञाने जीव सेवा” – जब तक जीव में शिव के दर्शन न हों, तब तक भक्ति अधूरी है।
दिनांक 9 मई को रामकृष्ण मिशन आश्रम, मोराबादी के प्रांगण में वार्षिक उत्सव का उत्साहपूर्वक शुभारंभ हुआ। इस प्रथम दिवस को ‘रामकृष्ण दिवस’ के रूप में मनाया गया, जिसमें संन्यासियों और विद्वानों ने श्री रामकृष्ण देव के जीवन दर्शन और स्वामी विवेकानंद के सेवा-धर्म पर गहन विचार रखे।
🌸 कार्यक्रम का शुभारंभ और भक्तिमय वातावरण
कार्यक्रम का आगाज़ आश्रम के पूज्य संन्यासी गण द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और श्री रामकृष्ण देव, माँ शारदा एवं स्वामी विवेकानंद के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
- उद्घाटन संगीत: स्वामी ईश्वरानंद जी ने अपनी मधुर आवाज में उद्घाटन संगीत प्रस्तुत किया।
- संगत: तबले पर श्री रेणुशंकर मिश्र ने कुशलतापूर्वक संगत कर वातावरण को आध्यात्मिक रस से भर दिया।
💡 विद्वान वक्ताओं के प्रेरणादायी विचार
आश्रम के वरिष्ठ सन्यासियों और अतिथियों ने ‘जीव सेवा’ को ही ‘शिव सेवा’ का पर्याय बताया:
- स्वामी भवेशानंद जी: उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वामी विवेकानंद का लक्ष्य भारत का पुनर्जागरण था। “शिव ज्ञान से जीव सेवा” और “वैष्णव सेवा” के माध्यम से उन्होंने विश्व को जगाने के लिए भारत के उत्थान को अनिवार्य बताया।
- स्वामी सत्संगानंद जी: आपने अवतार तत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि श्री रामकृष्ण देव में ‘नित्य’ और ‘लीला’ दोनों का अद्भुत समन्वय है। उपनिषदों के मंत्र ‘अङ्गुष्ठमात्रः पुरुषोऽन्तरात्मा’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ईश्वर हर जीव के हृदय में स्थित है, अतः जीव सेवा ही सच्ची पूजा है।
- श्री गजानंद पाठक जी: उन्होंने इतिहास के झरोखे से मथुर बाबू और ठाकुर की तीर्थ यात्रा का प्रसंग सुनाया। कैसे ठाकुर ने संथालों की दरिद्रता देखकर अपनी यात्रा रोक दी और उनकी सेवा को तीर्थ से ऊपर रखा।
- स्वामी आत्मनिष्ठानंद जी: आपने वेदांत को गुफाओं से निकालकर जन-साधारण के बीच लाने की बात कही। उन्होंने बताया कि अज्ञान का पर्दा हटते ही जीव और ईश्वर एक हो जाते हैं। बिना अहंकार के की गई सेवा ही ‘परम धर्म’ है।
🙏 आभार और समापन
कार्यक्रम के अंत में स्वामी अंतरानंद जी (सह सचिव, रामकृष्ण मिशन आश्रम, मोराबादी) ने सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने ‘कर्मयोग’ पर बल देते हुए कहा कि सर्व भूत (सभी प्राणियों) में ईश्वर के दर्शन करना ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।
- समापन संगीत: श्री सुकुमार मुखर्जी (संयोजक, भाव प्रचार परिषद्) द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें तबले पर श्री दिलीप बनर्जी ने साथ दिया।
- उद्घोषणा: कार्यक्रम का सफल संचालन श्री सुरेश नारायण झा ने किया, जिन्होंने श्री रामकृष्ण देव को समर्पित एक भावपूर्ण कविता भी प्रस्तुत की।
✨ मुख्य संदेश
आज का यह कार्यक्रम हमें याद दिलाता है कि धर्म केवल मंदिर या गुफा तक सीमित नहीं है, बल्कि दरिद्र और पीड़ितों की सेवा में ही ईश्वर की सच्ची व्याप्ति है।







