आज दिनांक 12 मई 2026 को वैदिक मंत्रोच्चार तथा पावन त्रिदेव — श्रीरामकृष्ण देव, श्री श्री माँ सारदा देवी एवं स्वामी विवेकानंद — के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ ग्राम महुवा जाड़ी स्थित विवेकानंद सेवा संघ, माण्डर में सामुदायिक भवन तथा “अखंडानंद शिक्षा एवं संस्कार केन्द्र ”का उद्घाटन स्वामी आत्मनिष्ठानंद जी के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ।

यह भवन रामकृष्ण मिशन आश्रम मोराबादी के सचिव स्वामी भवेशानंद जी के विशेष प्रयासों एवं प्रेरणा से निर्मित हो सका। इस अवसर पर उनके साथ स्वामी सुखमयानंद जी भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम में ग्रामीण आदिवासी महिलाओं ने लोकगीत एवं सरना गीत प्रस्तुत कर आध्यात्मिक वातावरण को भावविभोर कर दिया। उरांव (कुरुख) भाषा में प्रस्तुत मनोहारी नृत्य-संगीत तथा मांदर एवं ढोल की थाप पर जनजातीय संस्कृति की प्रस्तुति सभी के आकर्षण का केंद्र रही।

“अखंडानंद शिक्षा एवं संस्कार केन्द्र”के संयोजक श्री सुरेश नारायण झाने स्वामी विवेकानंद के साहित्य से ग्रामीण समाज में शिक्षा के महत्व पर प्रेरणा दायी पाठ प्रस्तुत किया।स्वागत भाषण श्री राम तिग्गा ने दिया, जबकि श्री कलिंदर गोप ने केन्द्र में चल रहे विकास कार्यों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मी श्री प्रदीप जी ने अपने उत्साहपूर्ण उद्घोषों से ग्रामीणों को प्रेरित एवं संगठित किया। ग्रामवासी श्री साधोराम तिग्गा ने आश्रम की चुनौतियों तथा ग्रामीणों के सहयोग एवं योगदान का उल्लेख किया। इस अवसर पर श्री अभय कुमार दुबे आयकर अधिकारी ने भी विशेष रुचि दिखाते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

रामकृष्ण मिशन आश्रम छपरा से जुड़े युवा भक्त श्री विशाल कुमार जी ने छपरा क्षेत्र में शिक्षा एवं ग्रामीण विकास के लिए किए गए संघर्षपूर्ण सेवा-कार्यों का प्रेरणादायी इतिहास प्रस्तुत किया, जिससे महुवा जाड़ी के जनजातीय समाज को नई प्रेरणा प्राप्त हुई।

अखंडानंद शिक्षा एवं संस्कार केन्द्र के प्रभारी संन्यासी स्वामी सुखमयानंद जी ने अपने उद्बोधन में एकता एवं संगठन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बच्चों का पालन-पोषण छोटे पौधों की भाँति स्नेह एवं संरक्षण के साथ होना चाहिए। उन्होंने सभी को यह स्मरण रखने का संदेश दिया कि प्रत्येक प्राणी में ईश्वर का वास है।

स्वामी भवेशानंद जी ने अपने प्रवचन का प्रारंभ शांतिमंत्र से किया। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन आश्रम मोराबादी विगत लगभग 40 वर्षों से इस क्षेत्र में सेवा कार्य कर रहा है। उन्होंने “अखंडानंद शिक्षा एवं संस्कार केन्द्र”को ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का सशक्त माध्यम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा अभिभाव कों से अपने बच्चों को निःशुल्क शिक्षा एवं संस्कार हेतु केन्द्र से जोड़ने का आग्रह किया।

उन्होंने ग्रामीणों से सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने तथा बच्चों के श्रेष्ठ विद्यालयों में नामांकन हेतु जन्म प्रमाणपत्र एवं आधार कार्ड बनवाने पर विशेष ध्यान देने का अनुरोध किया। साथ ही जैविक खेती को अपनाने तथा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को संगठित होकर कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने विकास के “पंचसूत्र”बताए—शिक्षा, संस्कार, संगठन, जैविक खेती तथा सेवा एवं दान। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पुस्तकालय की स्थापना हेतु रामकृष्ण मिशन आश्रम मोराबादी अपेक्षित सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने “नाम, काम और दाम”—इनतीनमंत्रोंकोजीवनमेंधारणकरनेकासंदेशदिया।

अपने अत्यंत सरल किंतु सारगर्भित संबोधन में स्वामी आत्मनिष्ठानंद जी ने कहा कि यहां आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता एवं आत्मिक शांति का अनुभव हुआ। उन्होंने ग्रामीणों की प्रार्थना एवं संगीत प्रस्तुति की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा सामुदायिक भवन के निर्माण को ग्रामीण एकता का जीवंत प्रतीक बताया।

उन्होंने स्वामी अखंडानंद जी का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने खेतड़ी में संन्यास की एक नई व्याख्या प्रस्तुत की थी। उनका स्पष्ट संदेश था — “खाली पेट धर्म नहीं होता।”उन्होंने बताया कि स्वामी अखंडानंद जी ने खेतड़ी नरेश के सहयोग से निर्धन बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था कर समाज सेवा को आध्यात्मिक साधना का स्वरूप प्रदान किया।

उन्होंने उपस्थित अभिभावकों एवं मातृशक्ति से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को इस निःशुल्क शिक्षा एवं कोचिंग केन्द्र से अवश्य जोड़ें तथा उन्हें प्रदान की जा रही शैक्षणिक सामग्री का सदुपयोग सुनिश्चित करें।

कार्यक्रम के अंत में “अखंडानंद शिक्षा एवं संस्कार केन्द्र”को शैक्षणिक सामग्री स्वामी भवेशानंद जी एवं स्वामी आत्मनिष्ठानंद जी द्वारा उपहार स्वरूप प्रदान की गई।धन्यवाद ज्ञापन श्री राम जी तिग्गा ने किया।

कार्यक्रम का समापन  ‘शांति मंत्र ‘के साथ अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति-भाव के वातावरण में संपन्न हुआ।