रामकृष्ण मिषन आश्रम, मोराबादी राँची के वार्षिकोत्सव में तीसरा दिवस स्वामी विवेकानन्द दिवस के रुप में मनाया गया। इस अवसर पर रामकृष्ण मिषन मिषन विवेकानन्द शैक्षणिक एवं षोध संस्थान के युवा जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में श्री गोपाल जी तिवारी, विषेष सचिव कृषि, पषुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार विषिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम में स्वामी भवेषानन्द, सचिव, रामकृष्ण मिषन आश्रम, तथा प्रषासनिक प्रमुख, रामकृष्ण मिषन मिषन विवेकानन्द शैक्षणिक एवं षोध संस्थान, मोराबादी राँची ने स्वागत भाषण में स्वामी विवकानन्द की भारत के पुर्नजागरण की संकल्पना को समझाते हुए कहा कि भारत इस पथ पर अग्रसर है। आज हमारी अर्थव्यस्था विष्व में सबसे तेजी से ऋिद्धि कर रही है, जैसे आज देष चावल उत्पादन में अव्वल स्थान हासिल करके विभिन्न्ा देषों को अनाज की पूर्ति कर रहा है। दिव्यायन कृषि विज्ञान केन्द्र तथा संस्थान द्वारा जैविक कृषि प्रणाली विकास एवं प्रसार के लिए किये जा रहे कार्याें का विवरण दिया। विद्यार्थीयों को कृषि तथा समाज के उत्थान के लिए कार्य करने के लिए प्रात्साहित किया। झारखण्ड सरकार के सहयोग की सराहना करते हुए धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम के विषिष्ट अतिथि श्री गोपाल जी तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी के विचार आज भी प्रासंगिक है तथा आने वाली कई सदियों तक प्रासंगिक रहंेगे। हम विकसित भारत की बात करते हैं लेकिन भारत को फिर से महान बनाने की बात करनी चाहिए। क्योंकि अतीत में भारत दुनिया के सबसे विकसित देषों में षामिल था। गुलामी के समय में हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नष्ट करने के कारण हम पिछड़ गये हैं। आज हम हमारी लगभग 140 करोड़ आबादी की मौलिक आवष्कताओं की पूर्ति के लिए उत्पादन करते रहें तो भी भारत दुनिया में उच्चतम स्तर पर बना रहेगा। ग्रामीण कारिगर के कौषल को मौका तथा उनके उत्पादनो को बाजार में अवसर प्रदान करना अत्यंत आवष्यक है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि में हजारों साल पहले विविध खोज तथा क्रांति हुए। आज हमारी आवष्यकता है कि गुणवŸाा पूर्ण खाद्य उत्पादन जो हमारे षरीर के लिए स्वास्थयपूर्ण हो और इस अभियान में प्रत्येक विद्यार्थीयों का अपना योगदान देना आवष्यक है।
स्वामी आत्मानिष्ठानन्द, सचिव रामकृष्ण मिषन विवेकानन्द स्मृति मंदिर, खेत्री (राजस्थान) ने कहा कि आज का दिन विद्यार्थियों की अदम्य इच्छा षक्ति, कड़ी मेहनत तथा अनुषासन से मिली सफलता का गौरव करने का है। स्वामी विवेकानन्द जी के ओजस्वी विचार युवाओं के लिए आज भी प्रेरणास्रोत हैं। विद्यार्थीयों के सफलता केवल व्यक्तिगत विकास के लिए नहीं होकर समाज के उत्थान के काम आना चाहिए।
इस कार्यक्रम में संस्थान के विद्याार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। इस वर्ष संस्थान में लिए गये विविध प्रतियोगिता तथा स्टार स्टुडेन्ट के पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम में लगभग 350 प्रतिभागियों ने भाग लिया।








